
साइकिल केवल चुनाव निशान नहीं है। प्रदेश की एक बड़ी आबादी ने इस साइकिल को सत्ता के गलियारे तक पहुँचाने में अपना ख़ून पसीना दिया है। इसलिये जो भी साइकिल के साथ है उसका जुड़ाव राजनीतिक कम भावनात्मक ज़्यादा है।
पहली बार जब साइकिल सत्ता के गलियारे तक पहुँची तो इस प्रदेश के मेहनतकश, खेतिहर और पशुपालक समाज को केंद्र में रखकर हर सरकारी नीतियाँ बनने लगीं।
जब इस साइकिल पर देश के रक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी आई तो किसानों के बेटों जो देश की सुरक्षा कर रहे हैं, को केंद्र में रखकर ऐसी ऐसी नीतियाँ बनाई गई जिसके कारण आज भी देश का हर सैनिक नेताजी को याद करता है।
उसी तरह जब Akhilesh जी ने ज़िम्मेदारी ली तो इस साइकिल की रफ़्तार को प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं, ग़रीब नौजवानों और किसानों के रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा की ओर मोड़ दिया।
जन विरोधी भाजपा सरकार में बड़ी उम्मीद से प्रदेश की जनता साइकिल की राह देख रही है। हमेशा की तरह साइकिल की रफ़्तार धीमी करने के लिए ग़रीब, किसान व नौजवान विरोधी ताक़तों ने धर्म को राजनीति में घसीटकर नफ़रत का व्यापार शुरू कर दिया गया है।
विरोधियों की हर साज़िश को इस साइकिल ने बड़े ही प्यार से कुचला है। अबकी बार साइकिल की रफ़्तार बता रही है कि विरोधियों को दर्दनाक रूप से रौंदा जाएगा। क्योंकि अबकी बार साइकिल की ज़िम्मेदारी जनता के हाथ में है और आप तो जानते ही हैं जनता बदला ज़रूर लेती है।
Ratnesh Shepherd