
देश में धार्मिक मनोरोगियों की पूरी फ़ौज तैयार है। देश के एक मंत्री ने जब ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो …. को’ का नारा दिया और एक दूसरे भाजपाई नेता ने दिल्ली में हिंदुस्तान और पाकिस्तान की सीमा खींच दी तो राष्ट्रभक्तों की कतारें सड़कों पर निकल आईं। परसो एक उन्मादी भक्त गोपाल ने ‘पाकिस्तान’ के एक शहर जामिया के इलाके में सर्जिकल स्ट्राइक कर एक ‘पाकिस्तानी’ युवा को गोली मारकर घायल कर दिया। आज देश के एक दूसरे उन्मादी कपिल गुर्जर ने ‘पाकिस्तान’ के एक दूसरे शहर शाहीन बाग़ में घुसकर गोलियों की बौछार ही कर दी।
यदि आप सरकार की नीतियों के विरोधी और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के समर्थक हैं तो आप भी पाकिस्तानी हैं। सावधान हो जाईए, कल भारत माता के ये ‘सपूत’ कट्टे लहराते हुए आपके दरवाज़े तक भी पहुंच सकते हैं !
धार्मिक नफरत इतनी बढ़ गयी है कि देश प्रेसर कुकर बन गया है। हर तरह जाहिलों और उन्मादियों की फौज उग आई है, देश कहाँ जाने वाला है पता नही। कितने पाकिस्तान उपन्यास में कमलेश्वर ने किसी की पंक्तियां उद्धरित किया है–
‘इन बंद कमरों में सांस घुटी जाती है।
खिड़कियां खोलता हूँ तो जहरीली हवा आती है।।’
– बरसाती मुनीब
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